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Yes, our Jammu call girls service is available across most major areas including hotels, apartments, and prime locations, depending on availability.

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Yes, we provide both in-call and out-call escort services in Jammu. You can choose your preferred option based on your comfort and location.

Call girl services in Jammu offer companionship for social events, meetings, and personal time. Services are customized based on client preferences.

Yes, we prioritize safety and confidentiality. All interactions are handled professionally with complete respect for privacy.

You can book easily through our website or WhatsApp. Browse profiles and choose the companion that suits your preference.

We accept both online and offline payments. Pricing is transparent with no hidden charges.

Yes, you can share your preferences while booking. We aim to provide a personalized and comfortable experience.

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नमस्कार दोस्तो! उम्मीद है कि आपकी सर्दी की रात अच्छी जा रही होगी। लड़कों को उनकी पसंद की लड़की और लड़कियों को उनके पसंद के लड़के मिल रहे होंगे! मेरा नाम टोटो है। टोटो मेरा निकनेम है। मैं भोपाल के पास एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। मेरी हाइट 5.8″ है। मैं न तो बहुत गोरा हूँ और न ही बहुत काला। मेरी उम्र 23 साल है। मैं जिम जाता हूँ और मेरी बॉडी काफी अच्छी है। लोग कहते हैं कि मेरी बॉडी अक्षय कुमार जैसी है! मुझे दाढ़ी और लंबे बालों का शौक है जो मुझ पर बहुत अच्छे लगते हैं। ये कहानी जो मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरे दोस्त की बीवी और मेरे बीच हुई जबरदस्त चुदाई की है। यह मेरी पहली कहानी है, तो अगर कोई गलती हो जाए तो माफ कर देना यार! और मुझे मेल करना बिल्कुल न भूलना। भाभी Xxx हिंदी कहानी 4 साल पहले की है। 12वीं पास किए हुए मुझे 8 महीने हो चुके थे। मैं इंस्टाग्राम पर रील्स देख रहा था. तभी मुझे एक लड़का मिला जो दिल्ली का रहने वाला था। उसका नाम यश वालिया था। हमारी बातें शुरू हुईं और फिर हम ऑनलाइन गेम भी खेलने लगे। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती पक्की हो गई। 12वीं पास किए हुए एक साल से ज्यादा हो चुका था। मेरे घर में पैसे की तंगी थी तो मुझे नौकरी की जरूरत थी। भोपाल में 15,000 से ज्यादा की जॉब मिलना मुश्किल था। मैंने यश से कहा,”यार, मुझे 25-30 हजार की जॉब चाहिए!” उसने एक हफ्ते का समय माँगा. मैंने कहा,”ज्यादा मेहनत वाला काम मत देखना!” उसने कहा,”ठीक है!” 10 दिन बाद यश का इंस्टाग्राम पर मैसेज आया। उसने मेरे लिए एक जॉब ढूंढ ली थी। जॉब एक शोरूम में थी, रहना-खाना फ्री था और 27,000 रुपये महीने की सैलरी थी। मुझे जॉब पसंद आई तो मैंने हाँ कर दी। घर वालों ने भी मुझे दिल्ली जाने की इजाजत दे दी। मैं दिल्ली जाने की तैयारी में जुट गया। दो दिन की पैकिंग के बाद मैं दिल्ली के लिए निकल गया। जब मैं दिल्ली पहुँचा, तो यश मुझे लेने कार से आया था। कार स्कॉर्पियो थी जो उसने 6 महीने पहले खरीदी थी। मैं गरीब घर से था तो मुझे कारों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। यश ने मुझे कार के बारे में सब बताया। फिर हम बातें करते-करते उसके घर पहुँच गए। यश का घर एक 2 BHK अपार्टमेंट था जो बहुत अच्छा दिखता था। उस वक्त उसकी बीवी घर पर नहीं थी। वो अपने मायके गई थी और 5 दिन बाद आने वाली थी। उस दिन हमने पहली बार मिलने की खुशी में खूब दारू पी। दारू के पैसे यश ने दिए। अगले दिन यश ने मुझे शोरूम में जॉब लगवा दी और उसके घर के पास एक फर्निश्ड रूम भी दिलवा दिया। रूम का किराया कंपनी दे रही थी। दिल्ली में मुझे मजा आने लगा। ऐसे ही 6 दिन निकल गए। मैं यश के घर आता-जाता रहता था। एक दिन जब मैं उसके घर गया तो उसकी बीवी मायके से वापस आ चुकी थी। यश ने मुझे उससे मिलवाया। उसका नाम सोनू वालिया था। दोस्तो, कसम से, जितनी तारीफ करूँ, उतनी कम है! उसकी हाइट 5.2″ थी, गोरा रंग, भरा हुआ शरीर, क्यूट सा चेहरा, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ, हीरे जैसी चमकती आँखें, और उसके चूचों और गांड का उभार! उसकी चलने की लचक मुझे पागल कर रही थी। उसका फिगर 36-25-36 था। उसे देखकर मैं कुछ देर के लिए सब भूल गया। यश ने हमारा परिचय कराया। सोनू चाय बनाने किचन में चली गई। मैं उसे देखकर पागल हो रहा था। मैंने मन ही मन उसे चोदने का प्लान बना लिया, पर यश की वजह से अभी कुछ कर पाना मुश्किल था। ऐसे ही 6 महीने बीत गए। एक दिन सोनू का कॉल आया कि यश की तबीयत खराब हो गई है और उसे अस्पताल ले जाना है। मैं ऑफिस से सीधे यश के घर गया और उसे अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने बताया कि उसके पेट में सूजन है, जिसकी वजह से खाना नहीं पच रहा और उसे बहुत कमजोरी हो रही है। ये सब उसकी ज्यादा दारू पीने की वजह से हुआ था। यश का इलाज एक साल तक चला। उसका स्वास्थ्य पहले से बेहतर था लेकिन कमजोरी की वजह से वो चल नहीं पाता था और खाना भी खुद नहीं खा पाता था। उसका वजन 80 किलो से घटकर 48 किलो रह गया था। यश की काफी प्रॉपर्टी थी, जिसका किराया उसे मिलता था, तो पैसे की कोई दिक्कत नहीं थी। मैं समय-समय पर उससे मिलने जाता था। एक दिन जब मैं यश के घर गया, वो सो रहा था। मैंने सोनू से यश के हालचाल पूछे। उसने बताया कि सब ठीक है। फिर हम इधर-उधर की बातें करने लगे। सोनू ने जींस और हाफ टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें उसके बूब्स का उभार गजब दिख रहा था। मैं तो खो सा गया था। सोनू ने मेरी आँखें पढ़ लीं और बात अधूरी छोड़कर किचन में चली गई। मैं भी उसके पीछे गया। वहाँ मैंने देखा कि वो रो रही थी। मैंने पूछा,”क्या हुआ?” उसने कहा,”जब से यश की हालत ऐसी हुई है, सब लोग मुझे हवस भरी नजरों से देखते हैं। मैंने सोचा टोटो, तुम अच्छे होगे, पर तुम भी वैसे ही निकले!” इतना कहकर उसने मुझे घर से बाहर निकाल दिया। मैं चुपचाप अपने घर चला गया। रात करीब 9 बजे सोनू का मैसेज आया,”सो गए क्या?” मैंने जवाब दिया,”नहीं!” सोनू,”आज तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे थे?” मैं,”तुम मुझे पहले दिन से बहुत अच्छी लगती हो!” सोनू,”अच्छा?” मैं,”हाँ, पर यश की वजह से मैं पहले कुछ बोल नहीं पाया, न अब बोल पा रहा हूँ!” सोनू,”सच कहूँ, तो तुम मुझे भी पसंद हो, पर मेरी शादी हो चुकी है। अब कुछ नहीं हो सकता!” मैं,”हाँ, बात तो सही है, पर दिल की बात दिल में नहीं रखनी चाहिए। इसलिए मैंने तुम्हें बता दिया!” मेरी बात सुनकर सोनू का कॉल आया। वो रोते हुए बोली,”टोटो, क्या तुम घर आ सकते हो?” इतना कहकर उसने कॉल कट कर दिया। मुझे डर हुआ कि कहीं यश को कुछ तो नहीं हो गया। मैं फटाफट उसके घर पहुँचा। जब मैं घर पहुँचा, सब ठीक था। यश सो रहा था। मैं सोनू के पास गया और पूछा,”क्या हुआ?” उसने मेरी तरफ देखा और मुझे किस कर दिया। मैं अचानक हुए इस किस से डर गया, फिर मैं भी उसे किस करने लगा। ये मेरी जिंदगी का पहला किस था, वो भी मेरे दोस्त की बीवी के साथ! वाउ! उसकी आँखें हवस और आँसुओं से भरी थीं। उसने बताया,”पिछले एक साल से मैंने सेक्स नहीं किया। इस वजह से मैं बहुत दुखी रहती हूँ!” मैंने कहा,”मेरे रहते तुम दुखी कैसे रह सकती हो?” हमने फिर से किस करना शुरू कर दिया। वो मुझे पागलों की तरह किस कर रही थी। उसने मेरी शर्ट और लोअर उतार दिया। मैंने उसका गाउन ऊपर कर दिया। वो मेरे सामने सिर्फ पिंक ब्रा और पैंटी में थी। उसे देखकर मैं पागल हो गया। मैं उसे पागलों की तरह किस करने लगा। मैंने उसकी ब्रा उतार दी और बच्चों की तरह उसके 36 साइज के गोल-मटोल बूब्स को पीने लगा। मैं उसके पिंक निपल्स को मैं दबा रहा था, पी रहा था और बीच-बीच में दाँतों से काट रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसके बूब्स लाल हो गए थे। वो बहुत गर्म हो चुकी थी; वो बेडशीट को मुठ्ठी में पकड़कर बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी। मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डालकर उसकी चूत सहलानी शुरू की। फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत पिंक थी। उसे देखकर मैं पागल हो गया। उसने कहा,”चूत चाटो!” मैं बिना कुछ सोचे पागलों की तरह उसकी चूत चाटने लगा। वो तड़प उठी और आवाजें करने लगी,”म्म्मह! हाम्म्म! वम्ममम! टोटो! चाटो! हा हा हा! मजा आ रहा है! और जोर से!” उसने मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह को अपनी चूत में पूरी ताकत से दबा दिया। मुझे साँस नहीं आ रही थी। वो अपनी गांड आगे-पीछे कर रही थी। फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। वो पानी चिपचिपा था। टेस्ट में कुछ खास नहीं था, पर हवस में वो पीना मजेदार था। उसके बाद वो उठी और मुझे किस करने लगी। वो मेरी गर्दन, छाती, निपल्स और नाभि पर किस करने लगी। उसने मेरा अंडरवियर उतार दिया। मेरा 6.3 इंच का लंड देखकर वो डर गई। उसने कहा,”इतना बड़ा!” मैंने कहा,”सबका इतना बड़ा होता है!” वो बोली,”नहीं, सबका इतना बड़ा नहीं होता!” फिर उसने मेरा लंड मुँह में लिया। जब उसने मुँह चलाना शुरू किया तो मैं सातवें आसमान पर था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। वो मेरे ऊपर थी। मेरा बीज निकलने वाला था। मैंने उसके बाल पकड़े। मैं मुँह में झड़ना नहीं चाहता था पर अपने आप हो गया। मैंने नीचे से पूरी ताकत से धक्के दिए। वो “उम्म्म उम्म्म” कर रही थी, पर मैं नहीं रुका और उसके मुँह में झड़ गया। जब मैंने उसे छोड़ा, तो उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे। वो फिर मुझे किस करने लगी। मैं उसकी चूचियों से खेलने लगा। वो बोली,”अब नहीं रुका जाता! जल्दी डाल दो!” मैंने बिना देर किए लंड उसकी चूत में डालना शुरू किया। सोनू की चूत थोड़ी टाइट थी तो मैंने थूक लगाया और पूरी ताकत से पेल दिया। उसे दर्द हो रहा था। उसने रुकने को कहा. पर मैं रुकने की हालत में नहीं था। ये मेरा पहला सेक्स अनुभव था। मैं मशीन की तरह चलता रहा। करीब 15 मिनट चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। उस रात मैंने 4 बार चुदाई की। ये थी मेरी पहली चुदाई की कहानी।

सिमरन और सरताज जब वापस लौटे तो बंटू का फिर से सिमरन के पास जाना, उस के साथ काम शास्त्र पर चर्चा करना और उस की भरपूर जवानी के मजे मारना शुरू हो गया। बंटू के पास के कमरे में कुछ दिन तो जैसे शांति रही, रात में कभी कभी वही मम्मी अंजू की पापा पर चिड़चिड़ सुनाई देती। वह समझ जाता कि उसके बाप ने आज फिर उस की मां को चोद के संतुष्ट करने की असफल कोशिश की है। सुबह भी केवल एक बार मेन गेट खुलने की आवाज आती, जब बंटू का बाप मॉर्निंग वॉक के लिए जाता। ऐसे ही समय अपनी रफ्तार से निकल रहा था। एक बार सिमरन सरताज के साथ फिर अपनी बहन के यहां गई हुई थी। बंटू ने सोचा कि आज तो सुबह सुबह मम्मी के कमरे में शांति रहेगी लेकिन सुबह फिर जब दो बार गेट के खुलने की आवाज आई तो बंटू की नींद उचट गई। बंटू को मम्मी के कमरे से फिर से कामुक आवाज़ें सुनाई देने लगीं। 1-2 बार जब मम्मी जोर से सिसकारी भर के खिलखिलाई तो वह हैरान हो गया कि आखिर माजरा क्या है? उसने अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए फिर से स्टूल पर स्टूल रखा और रोशनदान से झांका। उसने जो दृश्य देखा उस से उसका पूरा शरीर तपने लगा। वह देखता क्या है कि उसका दोस्त मोंटी, उसकी मां पर चढ़ा हुआ था और किसी जंगली की तरह दमदार चुदाई करके मां के मुंह से मस्ती भरी चीखें निकलवा रहा था। उसकी मम्मी बोल रही थी- साले तेरे लंड में भी, तेरे बाप के लंड की तरह बहुत अधिक दम आ गया है। बहुत मस्त चोद रहा है यार, शाबाश कस के रगड़! कुछ देर तक चलने वाली इस चुदाई के बाद अंजू बदहवास हो कर बोली- मोंटी, मैं झड़..ने वा..ली हूं, मैं झड़..ने वा..ली हूं मोंटी, मैं ग..ई, मैं ग..ई मैं ग..ई! मोंटी ने भी कुछ और करारे धक्कों के बाद अपने लंड से वीर्य की धार बंटू की मां की चूत में छोड़ी और पस्त हो कर उसकी मां के बेजान पड़े जिस्म पर ढेर हो गया। उस को मां की मस्त चुदाई देख कर यह तो अंदाजा हो चुका था कि मोंटी के लंड को भी सिमरन ने अब उसी के जैसे तैयार कर दिया था। बंटू के मन में कुछ प्रश्न उठ रहे थे कि आखिर आज सरताज अंकल के स्थान पर मोंटी उसकी मां चोदने कैसे आ गया? और उस की मम्मी कैसे बिना ऐतराज़ किए, बिना मोंटी से कुछ कहे, राजी खुशी उस से क्यों चुदवा रही है? उसने सोचा कि अब इस बारे में मोंटी से बात करनी ही पड़ेगी। बंटू के लिए चुदाई का यह दृश्य अनपेक्षित अवश्य था किंतु उसे पहले जैसा, बुरा नहीं लग रहा था क्यों कि वह भी तो मोंटी की मां चोद चुका था. और अभी तो यह बात सिमरन को भी पता नहीं थी कि बंटू उसकी बेटी की भी, उसी के कहने पर चुदाई कर चुका है। उसको रंडी मॅाम Xxx दृश्य देखकर आश्चर्य यह हुआ कि उसका मूड ऑफ नहीं हुआ बल्कि उलटे यह दृश्य उसका लंड अकड़ रहा था। अब तो उस के लिए भी अच्छा यही होगा कि यदि संभव हो तो कुछ नए नए प्रयोग कर के जिस्म की आग को बुझाया जाए। इस वासना भरे दिमाग में चल रही नित नई उथल पुथल को नए नए तरीकों से शांत किया जाए। उसने सोचा कि कुछ ही दिनों में सेक्स और वासना को ले कर उस की सोच में कितना बदलाव आ गया है, उसकी सोच अब कितनी खुली, कितनी परिपक्व हो गई है. जिस मां की कामुकता से वह बेहद परेशान था, सरताज अंकल से चुदने की घटना देखने के बाद तो उसे अपनी मां से चिढ़ हो गई थी वहीं आज अपने दोस्त द्वारा मां की चुदाई देखकर भी वह परेशान नहीं था। उस के बाद वह अपने लंड के तनाव को कम करने के लिए लंड को फेंटने लगा. अब उसकी स्तंभन शक्ति बढ़ चुकी थी इसलिए बंटू को अपने लंड को लगातार फेंटना पड़ा। उसे स्खलित होने में थोड़ा समय अधिक लगा लेकिन जब उस के लंड से वीर्य की पिचकारी छुटी और आंगन में बिखर गई तो उसके दिमाग में असीम शांति सी छा गई। उसको लगा कि जैसे रात में ज्यादा शराब पीने के कारण हुए हैंगओवर के इलाज़ के लिए सुबह थोड़ी ड्रिंक और कर के उतारा करना पड़ता है। उसी प्रकार पिछले दिनों में लगातार तीन चूतों को चोदने के बाद उसने दिमाग में बने वासना के हैंगओवर का मुट्ठ मार के उतारा कर लिया है। वह शरीर और दिमाग को हल्का करके स्टूल पर से उतरा और बिस्तर पर गिर के फिर से एक मीठी नींद लेने लगा। जब सिमरन वापस लौटी तो मोंटी की भीषण चुदाई से प्रभावित अंजू ने सिमरन को बताया- मोंटी का जल्दी कुछ करो दीदी, उस की कामवासना, उस की उत्तेजना तो उसके काबू के बाहर हो रही है। सुबह मेरा सरताज तो एक बार चोद के चला जाता था, पर … सिमरन ने मुस्कुरा के टोका- अच्छा तो अब सरताज तेरा हो गया?? अंजू झेंप गई बोली- क्या दीदी तुम भी …?? बाप बेटे तो मेरे मज़े ले ही रहे हैं, तुम भी मेरे मज़े ले रही हो?? सिमरन ने फिर टोका- बाप-बेटे तेरे मजे ले रहे हैं या तू उन दोनों के मजे ले रही हैं साली चुदक्कड़? अंजू दोबारा खिसिया गई। वह सिमरन को मुंह बनाते हुए बोली- दीदी, मेरी बात तो सुन तो लो, क्यूँ मेरी खिंचाई करने में लगी हो? सिमरन ने कहा- अच्छा, चल बता, क्या कह रही है? अंजू ने कहा- मैं कह रही थी कि तुम ने सरताज के बदले मोंटी को मेरे पास भेज तो दिया पर मोंटी को एक बार की चुदाई से तो शांति नहीं मिलती। वह कुछ देर रुकता है फिर एक और बार चोदता है। अगर मैं कहती हूं कि मेरी चुदवाने की बिल्कुल इच्छा नहीं है तो बोलता है मेरा तो लंड खड़ा हो गया है, चुदवाना नहीं है तो गांड मरवा। मुझे तो एक और बार डिस्चार्ज करना है। उसके बाद जबरन मेरी गांड मारता है और इतने वहशी तरीके से लंड के रगड़े लगाता है कि एक बार तो जब उस के लंड के रगड़ों से मेरी गांड सूज गई थी तो मैंने उस से गांड मरवाने के लिए भी मना करा! मैंने उसे कहा कि हरामखोर तूने मेरी गांड सूजा दी है, आज तो रहम कर मुझ पर। फिर भी उस ने मेरी एक न सुनी और जबरन मेरे मुंह में लंड घुसेड़ कर, मुख चोदन का मज़ा लिया और मुंह में डिस्चार्ज करने के बाद मेरे यहां से गया। मम्मी ने आगे बोला- मोंटी से तो सरताज अच्छा है, जो आता है, चुदाई करता है, ऑर्गेज्म देता है और चुपचाप चला जाता है। सिमरन को उस की इस बात पर हंसी आ गई, उस ने कहा- अंजू, मुझे तो तेरी शिकायत में मोंटी की तारीफ सुनाई दे रही है। अंजू झेंप कर चुप हो गई। क्योंकि अक्सर ऐसा होता है जब कोई व्यक्ति दिमाग में छाया होता है तो इसका जिक्र किसी न किसी बहाने करने से मन को अजीब सी खुशी मिलती है। सिमरन बोली- मुझे तो लग रहा है कि मोंटी के लंड ने तेरी चूत को ही नहीं, तुझे भी प्रसन्न कर रखा है। अंजू निरुत्तर थी कुछ बोल नहीं पाई। सिमरन बोली- देख अंजू, अभी मोंटी की नई नई जवानी फूटी है, अभी उसकी वासना उफान पर है और सेक्स में केवल अपना नहीं अपने पार्टनर का ध्यान भी रखना पड़ता है। इतना तो तू भी जानती ही है, तो यदि उसके लंड का सुख हासिल करना है तो कैसे भी करके उसकी वासना को ठंडी करना तेरी जिम्मेदारी है। मैं उस को इस बारे में कोई ज्ञान नहीं दे सकती। बंटू और मोंटी मिलते रहे, कई सारी अन्य बातों के साथ कुछ न कुछ कामुक बातों का जिक्र भी आ जाता था दोनों लगातार एक दूसरे की मां के साथ चुदाई के खेल, खेल रहे थे। बंटू की मम्मी अंजू, कभी सरताज से चुदवाती और कभी उसकी अनुपस्थिति में मोंटी से! एक दिन बातों बातों में मोंटी ने बंटू से पूछा- यार बंटू, तू यह बता कि जब मैं पम्मी से मिलने यहां आता था, तब तू मम्मी के पास क्या करने जाता था? बंटू ने जवाब दिया- क्यों तूने आंटी से नहीं पूछा? मोंटी ने कहा- मम्मी तो बात को घुमा देती थी और पम्मी का जिक्र छेड़ देती थी तो मैं कुछ कह नहीं पाता था। बंटू ने कहा- मैं आंटी के पास क्या करने जाता था, उसके बारे में बताने के पहले तुझे यह बता दूं कि मुझे तेरी हर हरकत की जानकारी है। मोंटी को ऐसा लगा कि शायद उसकी पोल खुल चुकी है, वह एकदम उत्तेजित हो उठा लेकिन उसने अपने आप को सामान्य करते हुए बंटू से पूछा- अच्छा चल पहले तू यह बता कि तुझे मेरी कौन सी हरकत की जानकारी है? बंटू ने कहा- मुझे पता है कि तू सुबह-सुबह आकर मेरी मां की चुदाई करता है। जो तू मेरी मां के साथ करता है। वही मैं तेरी मम्मी के साथ करता हूं। मोंटी हैरत से बंटू को देख रहा था कि वह यह क्या कह रहा है? उसे बंटू और मम्मी को ले कर कुछ संदेह तो था लेकिन उसकी मम्मी बंटू से चुदवा चुकी होगी, ऐसा तो उस ने सपने में भी नहीं सोचा था। उसके बाद बंटू ने उसको पूरी कहानी सुना दी कि कैसे वह पम्मी के आने की खबर देने सिमरन आंटी के पास गया था और कैसे आंटी ने उस की हसरतों में वासना की आग भरी। कैसे सिमरन ने उसे वीर्य स्तंभन का पाठ पढ़ाया और कैसे उन के साथ में उस की कामक्रीड़ा शुरू हुई और बात किस तरह चुदाई तक पहुंची। मोंटी ने कहा- यार कितनी अद्भुत बात है कि लोग वाइफ़ स्वैपिंग करते हैं, गर्लफ्रेंड स्वैपिंग करते हैं, हम दोनों की तो मम्मी स्वैपिंग हो गई। दोनों खिलखिला कर हंस पड़े और गले से लग गए। सिमरन जैसी अनुभवी औरत की सफल चुदाई एवं पम्मी जैसी कुंआरी लड़की की सील तोड़ विलक्षण चुदाई के अनुभव के उपरांत बंटू और अंजू की चीखें निकलवा देने वाली चुदाई से मोंटी पम्मी की पहली असफल चुदाई की ग्लानि से पूरी तरह उभर चुके थे। दोनों के मस्तिष्क का तनाव खत्म हो चुका था. लेकिन बंटू ने अभी उस से वह राज छुपा लिया जो उसने अभी तक सिमरन से भी छुपा रखा था। वह यह कि उसकी बहन किस तरह अपनी मम्मी और बंटू की चुदाई का पता चलने पर, भड़की कामवासना के कारण उस से चुदाने के लिए विवश हो गई थी। किंतु इंसान का स्वभाव होता है कि वह जिस रहस्य को अपने मन में दबा के रखना चाहता है, उसी को उजागर करने की प्रबल इच्छा भी उसके मन में सिर उठाती रहती है। उस पर मोंटी की बहन जस्सी को उसी के आग्रह पर चोदने जैसी उपलब्धि यदि बंटू ने प्राप्त की हो तो उसको वह कब तक मन में दबा के रख सकता था? अगले दिन की बात है, पम्मी का रिश्ता निश्चित होने का समाचार बंटू को प्राप्त हुआ। वह मोंटी से मिला, जब उस ने मोंटी को यह शुभ समाचार सुनाया तो उसने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। बंटू से रहा नहीं गया, उसने मोंटी से पूछा- क्या बात है यार? तुझे खुशी नहीं हुई कि अपनी दोस्त का विवाह निश्चित हो गया है? मोंटी ने कहा- नहीं यार, मुझे पम्मी से कोई मतलब नहीं। उस ने एक तरह से मेरी इंसल्ट की थी। बंटू ने पम्मी की तरफ से सफाई देते हुए कहा- यार, उसके पीरियड शुरू हो गए तो उसमें, उसकी क्या गलती थी? उसके बाद भी उसने हाथ से फेंट कर, डिस्चार्ज करा के, तेरे लंड का तनाव तो खत्म किया था या नहीं? मोंटी ने कहा- हां यार, तू सही कह रहा है। वास्तव में उसकी कोई गलती नहीं थी। बंटू ने फिर पूछा- अच्छा तू यह बता कि कभी शादी के पहले यदि पम्मी यहां आई तो तेरी क्या इच्छा है? मोंटी ने कहा- यार, ये भी कोई पूछने की बात है? कौन सा लड़का ऐसा होगा जो पम्मी जैसी लड़की को मौका मिलने पर चोदना नहीं चाहेगा? बंटू ने अब अपने मन की वह बात जुबां पर लाने की ठान ली जिस के लिए उस ने इतनी लंबी भूमिका बनाई थी। उसने मोंटी से कहा- अच्छा एक बात तो बता, सिस्टर स्वैपिंग के बारे में तेरा क्या विचार है? मोंटी तुरंत समझ गया कि बंटू क्या कहना चाह रहा है। उसने गुस्से में बंटू को कहा- देख बंटू, खोपड़ा तो खराब कर मत वरना झगड़ा हो जाएगा। बंटू ने कहा- यार, तू बिना मतलब नाराज हो रहा है. मैंने तो केवल तेरे विचार जानना चाहे थे. और यूं देखा जाए तो जब हमने एक दूसरे की मां चोद दी तो फिर उसके मुकाबले बहन चुदाने से क्या फर्क पड़ जाएगा? उसके बाद बंटू ने मोंटी के दिमाग के जाले साफ करते हुए कहा- मोंटी, तू मेरा जिगरी यार है इसलिए मैं तुझ से कुछ भी छुपाना नहीं चाहता। वास्तव में बात यह है कि मैं जस्सी दीदी को उन्हीं के कहने पर चोद चुका हूं। मोंटी ने एकदम आश्चर्य से बंटू की ओर देखा और कुछ आवेश में कहा- बंटू, देख झूठ मत बोल। जस्सी ऐसी लड़की नहीं है। बंटू ने कहा- मोंटी देख, हर लड़के को अपनी मां और बहन तथा हर लड़की को अपना बाप और भाई बहुत शरीफ लगते हैं। तू तो पहले ठंडे दिमाग से मेरी बात सुन! मोंटी ने अपने दिमाग को शांत करते हुए कहा- अच्छा बता कि यह सब कैसे हुआ? उसके बाद बंटू ने जस्सी को चोदने की अपनी पूरी कहानी मोंटी को सुना दी। मोंटी ने भी यह विचार किया कि जब हमारे मां बाप हजारों बार चुदाई कर लेने के बाद भी अभी भी नए साथियों के साथ जीवन का आनंद उठा रहे हैं, फिर मेरी और जस्सी की जवानी यदि उफान पर है तो आश्चर्य कैसा?? जब मोंटी के मन ने जस्सी की चुदाई को स्वीकार कर लिया तो फिर उसका ध्यान पुनः पम्मी की ओर गया। उसने बंटू से कहा- चल ठीक है यार तूने जो किया। अब तू यह बता कि मुझे पम्मी की चूत कैसे मिल सकती है? बंटू ने कहा- मैं तुझे आश्वस्त करता हूं कि शादी के पहले या शादी के बाद तुझे पम्मी की चूत मैं अवश्य दिलवाऊंगा। मोंटी ने कहा कि शादी के बाद तो यह कैसे संभव हो सकता है? बंटू ने कहा- यार, जो लड़की शादी के पहले तेरे मेरे लंड से खेल चुकी हो, हो सकता है उसने यहां से जाने के बाद और भी लंड लिए हों। ऐसे में शादी के बाद क्या वह केवल अपने पति के लंड से संतुष्ट होकर रह पाएगी? मुझे पूरा विश्वास है कि पम्मी भी कोई ना कोई जादू अपने पति पर ऐसा चलाएगी कि उसे भी अपने रंग में रंग लेगी। बंटू की बातों ने मोंटी के दिमाग से तनाव को दूर करके उस तनाव को उसके लंड में भेज दिया।

क्यूट टीचर लव लस्ट कहानी में एक नई जवान टीचर हमारी क्लास में आई. मैं तो उसका दीवाना हो गया. फिर स्कूल छोड़ने के बाद मेरी उससे दोस्ती हो गयी. हम बातें करने लगे. यह बात तब की है ज़ब मैं 12वीं क्लास में था. पिछली क्लास में हमारी इंग्लिश की टीचर थी एक बूढी मैम. क्या तो उसने पढ़ाना था और क्या हमने पढ़ना था … बस जैसे तैसे करके हम पास हुए थे. और यह बात हमारी प्रिंसिपल को पता थी तो उन्होंने नई क्लास में हमारी टीचर बदल दी. और हमारी नयी टीचर आयी शिप्रा मैम। क्या लगती थी वह यार … एकदम मस्त फिगर … गोल गोल चूचे, मस्त गांड और पतली कमर! उसके होंठ के ऊपर प्यारा सा तिल था जो उसकी ख़ूबसूरती को और ज्यादा बढ़ाता था। ज़ब वह पहली बार क्लास में आयी मैं तो तभी से उसका दीवाना हो गया था. पर कर भी क्या सकते थे उसे देख के मुठ मारने के अलावा! ज़ब वह क्लास में आती सब लड़के चुपचाप उसे देखते रहते और वह पढ़ा के चली जाती थी। ऐसे ही मैम को देखते देखते इंटरनल एग्जाम आ गए और पूरी क्लास में मेरे सबसे ज्यादा मार्क्स आये इंग्लिश में! मेरी तारीफ हुई और शिप्रा मैम की भी तारीफ हुई. मैम ने मुझसे हाथ मिला के मुझे बधाई दी। मैं तो मैम के हाथ मिलाने से ही खुश हो गया और उस दिन उसी हाथ से मैंने 3 बार मैम को सोच के मुठ मारी। बस मैं दीवाना था शिप्रा मैम का … यार! उसकी स्माइल, उसका फिगर, उसके मस्त चूचे … बस यही घूमता रहता था दिमाग में मेरे हर टाइम! अब बस मजेदार दिन कट रहे थे, शिप्रा मैम पढ़ाती थी और हम उनको देखते हुए पढ़ रहे थे। उस टाइम मोबाइल नये नये आये थे तो मैंने भी घर वालों से ज़िद करके मोबाइल ले लिया था। थोड़े दिन में ही मैं मोबाइल स्कूल में ले जाने लगा तो मुझे गेम खेलने की आदत पड़ गयी। एक दिन मैं शिप्रा मैम के पीरियड में गेम खेल रहा था तो उन्होंने देख लिया. शिप्रा ने मेरा मोबाइल ले लिया और कहा- स्टाफ रूम में आकर ले जाना। मैं डरते डरते स्टाफ रूम पहुंचा. तो वहां मैम अकेली थी. उन्होंने पहले मुझे डांटा, फिर प्यार से समझाया- तुम अच्छे स्टूडेंट हो. ऐसे करोगे तो बढ़िया मार्क्स नहीं ला पाओगे। मैंने मैम को प्रॉमिस किया- मैं सबसे अच्छे मार्क्स लेकर आऊंगा क्लास में! तो मैम बोली- अगर तुम सबसे अच्छे मार्क्स लेकर आओगे तो तुम्हें मैं गिफ्ट दूंगी! फिर उन्होंने मोबाइल वापस कर दिया। मैंने भी सोच लिया था कि स्कूल में सबसे अच्छे नंबर मैं ही लाऊंगा. और फिर आये भी! मेरे 97 मार्क्स आये … पूरे स्कूल में सबसे ज्यादा! पर तब तक मैं शिप्रा मैम की गिफ्ट वाली बात भूल गया था। रिजल्ट के बाद मैंने कॉलेज में अड्मिशन ले लिया। एक दिन मेरे मोबाइल पर अननोन नंबर से मैसेज आया- हेलो सुमित, हाउ आर यू? मैं- हेलो, आई ऍम फाइन! यू टेल? “आई ऍम आल्सो गुड. हाउ इस लाइफ गोइंग ऑन?” मैं- लाइफ इस गुड. मे आई नो हु आर यू? “शिप्रा दिस साइड सुमित!” मैं- ओह हेलो शिप्रा मैम! शिप्रा- अब मैं तुम्हारी मैम नहीं हूँ सुमित! मैं- लेकिन स्कूल में थी ना! शिप्रा- तब थी. अब तुम कॉलेज में हो। मैं- आपकी वजह से मैम … आपने इतना अच्छा पढ़ाया, तभी मैं इस कॉलेज में अड्मिशन ले सका। शिप्रा- नहीं, ये सब तुम्हारी मेहनत का फल है। मैं- आपका बड़प्पन है मैम. क्या हम बाद में बात करें मैम, मेरा लेक्चर है अभी! फिर मैं बिजी हो गया और फिर शनिवार को मैं घर आ गया. और रात को मैं ऐसे ही मोबाइल पर गेम खेल रहा था तो शिप्रा मैम का मैसेज आया- हेलो सुमित! मैं- हेलो मैम, कैसी हो? शिप्रा- मुझे मैम ना कहो सुमित। मैं- तो मैं आपको क्या कह कर बुलाऊँ? शिप्रा- तुम मुझे शिप्रा कह सकते हो या मेरा घर का नाम शिपि! मैं- अजीब लगेगा शिप्रा बोलते हुए मैम! शिप्रा- अगर तुम मुझे शिप्रा बुलाओगे तो मुझ्र अच्छा लगेगा। मैं खुश हो गया कि क्या बात है यार … मैम तो ज्यादा ही फ्रेंडली हो रही है। शिप्रा- तो क्या कर रहे थे? मैं- मोबाइल में गेम खेल रहा था। शिप्रा- अब बड़े हो गए हो. मोबाइल की गेम्स खेलने की उम्र गयी अब! मैं- आई लव प्लेइंग गेम्स यार! शिप्रा- ओहो … अभी तो शिप्रा बोलना अजीब लग रहा था, अब यार बोल रहे हो। मैं- सॉरी, वह गलती से फ्लो में टाइप हो गया। शिप्रा- डोंट बी सॉरी यार … आई लाइक इट. एट लीस्ट तुम थोड़े फ्रैंक तो हुए! मैं- तो अभी भी स्कूल टीचर हो? शिप्रा- यस आई लव टीचिंग। मैं- ओके गुड और कुछ बताओ। शिप्रा- कुछ ख़ास नहीं …बस चल रहा है. तुम बताओ? मैं- कुछ नहीं तुम्हारे जैसे ही! शिप्रा- ओके तो करते है बात जल्दी! मैं- ओके गुड नाईट। ऐसे ही चलता रहा, थोड़े दिन बात होती रही. फिर एक दीजिये मेरा मूड थोड़ा ख़राब था तो मैंने दारू पी ली और घर पर मैं अपने रूम में था. तभी शिप्रा का मैसेज आया- हेलो, हाउ आर यू? मैं- मैं ठीक नहीं हूं, कृपया हम सुबह बात करेंगे। शिप्रा- ठीक है. लेकिन एक दोस्त के रूप में क्या मैं पूछ सकती हूं कि क्या ठीक नहीं है? मैं- नो प्लीज! शिप्रा- ओके, अभी तुम ठीक नहीं हो, सुबह बात करेंगे. पर अगर तुम्हें बात करनी हो तो मैं हमेशा अवेलेबल हूँ. कभी भी बात कर सकते हो। मैंने यह मैसेज नहीं पढ़ा और मैं सो गया. रात को 3 बजे मेरी नींद जल्दी खुल गयी और मैंने उसका मैसेज पढ़ा. और पता नहीं क्यों मैंने रिप्लाई कर दिया- क्या हम बात कर सकते हैं? मैंने सोचा कि शिप्रा सो रही होंगी पर उसका एकदम रिप्लाई आ गया। शिप्रा- यस, हम बात कर सकते हैं. बोलो? मैं- आप इस टाइम तक जगी हो यार? मैंने तो ऐसे ही मैसेज किया था, नींद खुल गयी थी। शिप्रा- मैं जगी हुई थी तुम्हारे लिए वरिड थी। मैं- सॉरी, मैंने थोड़ी पी हुई थी इसलिए थोड़ा रयूडली बात की. आई ऍम सॉरी। शिप्रा- ठीक हो अब? मैं- हाँ ठीक हूँ। शिप्रा- पूछ सकती हूँ क्या हुआ? मैं- बस कॉलेज में फ्रेंड से लड़ाई हो गयी थी। शिप्रा- फ्रेंड या गर्लफ्रेंड? मैं- फ्रेंड से यार … मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है। शिप्रा- तो इसका मतलब पियोगे? मैं- मन किया तो पी ली। शिप्रा- तुम भी अजीब हो. लोग तो पीकर रोमांटिक होते हैं, तुम रयूड हो गए। मैं- सॉरी ना यार! शिप्रा- कोई बात नहीं, अब ठीक हो ना! मैं- हाँ ठीक हूँ. उतर गया नशा. और थैंक यू। शिप्रा- थैंक यू क्यों? मैं- मुझे इस टाइम सच में बात करने का मन था। शिप्रा- नो नीड टू थैंक्स. आई ऍम ऑलवेज अवेलेबल फॉर यू! मैं- आई नो … इसलिए मैसेज किया इस टाइम! शिप्रा- तुम कभी भी मैसेज कर सकते हो। मैं- 😘😘😘 शिप्रा- 🥰🥰🥰 मैं- सॉरी गलती से किस इमोजी भेज दी, थैंक्स की भेजनी थी। शिप्रा- कोई बात नहीं, फ्रेंड्स में चलता है। मैं- थैंक यू फॉर बीइंग हेर फॉर मी. आई रियली नीड समवन विद मी नाउ! शिप्रा- आई ऍम ऑलवेज बी विद यू! मैं- कुछ और बात करते हैं। शिप्रा- हाँ … अपने बारे में कुछ कहो! मैंने इतनी देर में फेसबुक से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी और उससे कहा- पढ़ लो अबाउट मी। उसने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की। शिप्रा- तुम बदल गए हो बड़े … और बॉडी फिट हो गयी है तुम्हारी! मैंने उसकी फोटोज ढूंढी. पर उसने कोई फोटो नहीं डाली थी तो मैंने पूछ लिया- तुमने नहीं डाली कोई फोटो? शिप्रा- नहीं, मुझे पसंद नहीं फेसबुक पर फोटो डालना। मैं- ओके. शिप्रा- मैं चाहती हूँ कि बस मेरे दोस्त और मेरे करीब के लोग ही देख सकें मेरी फोटो! मैं- ओके तो मतलब मेरा तो कोई चांस ही नहीं है? शिप्रा ने मुझे अपनी काफ़ी सारी फोटो भेजी। मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया उसकी फोटो देख के! पहले से ज्यादा मस्त फिगर मोटे चूचे, मस्त गांड और पहले से तो बहुत ज्यादा खूबसूरत! शिप्रा- तुम करीबी दोस्त हो। मैं- पहले से भी ज्यादा सुन्दर हो गयी हो आप! शिप्रा- मेरे करीबी दोस्त मुझे आप नहीं बोलते. तुम यार बोलो, ज्यादा अच्छा लगता है। मैं- यार, पहले से ज्यादा सुन्दर हो गयी हो। शिप्रा- तुम भी तो ड्यूड हो गए हो अब! मैं- एक बात पूछूँ? व्हाट् इस योर ऐज? शिप्रा- लड़कियों से उनकी उम्र नहीं पूछते। मैं- हाँ, पर दोस्त से तो पूछ सकते हैं। शिप्रा- तुमसे 3 साल बड़ी हूँ। मैं- तब तो सेम ऐज की हो कॉलेज में होती तो! शिप्रा- तो? मैं- कुछ नहीं … छोड़ो। शिप्रा- नहीं नहीं बताओ, कॉलेज में होती तो? मैं- नहीं, प्लीज कुछ नहीं। शिप्रा- प्लीज बताओ यार मुझसे क्या शर्म? मैं- नहीं प्लीज। शिप्रा- प्लीज बताओ ना कॉलेज में होती तो? मैं- तो सीनियर को तो पटा ही सकते हैं. 3 साल का ऐज गैप कुछ नहीं होता। शिप्रा- अच्छा जी, ख्वाब देखने छोड़ दो, सीनियर को पटाना मुश्किल होता है। मैं- यू आर माय सीनियर राइट नाउ! शिप्रा- ऐसा कुछ नहीं है. समझे ना … हम बस दोस्त हैं। मैं- हाँ करीबी दोस्त! शिप्रा- अब मूड ठीक है? मैं- हाँ बिल्कुल बात करके मस्त हो गया मूड। शिप्रा- अब सोने का क्या विचार है। मैं- ट्रॉय कर सकते हैं। शिप्रा- ओके गुड नाईट बट इफ यू नीड मी आई ऍम हेर फॉर यू! मैं- आई नो गुड नाईट। शिप्रा- गुड नाईट। अब ऐसे ही हमारा चलता रहा काफ़ी दिन! सुबह उठते ही गुड मॉर्निंग और रात को लेट नाईट तक बातें। हम एक दूसरे को पसंद करने लगे थे पर कह नहीं पर रहे थे। मेरी भावनाएं क्यूट टीचर के प्रति लव लस्ट की थी. डायरेक्ट हमने एक दो बार मिलने का प्रोग्राम बनाया और मिले भी. उसका मस्त फिगर देख के मेरा हर बार खड़ा हो जाता था. हम ऐसे मिलते जैसे लवर हों। एक शहर में रहते थे तो मिलने का लफड़ा भी नहीं था। वह अपनी दीदी के साथ रहती थी यहाँ पर उसकी दीदी ज्यादातर बाहर ही रहती थी जॉब की वजह से महीने में एक दो दिन के लिए ही आती थी. मैं गया था एक दो बार उसके घर भी! वह शॉपिंग जाती तो मुझे दिखा के ड्रेस लेती और मैं भी! फिर हम फ़ोन पर भी बातें करने लगे रात को लेट तक! एक दिन मैं अपने कमरे में पी रहा था तो उसका कॉल आया। शिप्रा- हेलो जी! मैं- हेलो! शिप्रा- क्या कर रहे हो? मैं- आज ड्रिंक लेने का मन था तो पी रहा हूँ। शिप्रा- क्या हुआ? सब ठीक है ना? तुम ड्रिंक तब करते हो ज़ब मूड ख़राब होता है। मैं- नहीं, मूड ठीक है बस मन था तो पी रहा हूँ. वैसे शाम को कहाँ थी? आज मैसेज भी किया कॉल भी रिप्लाई नहीं किया तुमने? शिप्रा- शॉपिंग गयी थी दीदी के साथ … इसलिए नहीं कर पायी रिप्लाई। मैं- कमाल है आज पहली बार हुआ है कि शॉपिंग गयी हो तुम! और मुझे नहीं पता, मुझे बिना दिखाए शॉपिंग कैसे की आज पहली बार? शिप्रा- आज शॉपिंग तुम्हें दिखा के करने वाली नहीं थी। मैं- अच्छा जी, ऐसा क्या लिया जो मुझे नहीं दिखा सकती थी। शिप्रा- थी कुछ शॉपिंग जो तुम्हें नहीं दिखा सकती थी। मैं समझ गया था कि वह ब्रा पैंटी लेने गयी थी. पर मैंने सोचा कि और मज़े लेता हूँ- कमाल है, कपड़े ही तो लायी होगी। शिप्रा- हाँ कपड़े ही हैं पर … मैं- क्या पर … कमाल है, अपने करीबी दोस्त को नहीं दिखाओगे क्या लाई हो आज? शिप्रा- नहीं ना प्लीज! मैं- अब तो मुझे जानना है कि क्या लायी हो. दिखाओ चलो। शिप्रा- दिखा नहीं सकती प्लीज! मैं- तो बता दो क्या लायी हो। शिप्रा- ओहो ज़िद्दी इंसान पीछे ही पड़ जाते हो। मैं- ज़ब पता है मैं ज़िद्दी हूँ पता करके ही मानूंगा. तो बता दो पहले ही! शिप्रा- अंडरगारमेंट्स लेने गयी थी. खुश? मैं- ले … मुझे लगा पता नहीं क्या लायी हो. इसमें क्या शर्माना यार … ये तो नीड है। शिप्रा- हाँ पर अजीब तो लगता है बताते हुए! मैं- करीबी दोस्त हर चीज शेयर करते हैं। शिप्रा- तुमने तो कभी शेयर नहीं किया ऐसा कुछ? मैं- तुमने पूछा ही नहीं कभी! शिप्रा- अच्छा जी, पूछूंगी तो बता दोगे सच सच? मैं- पूछ के देख लो। शिप्रा- पक्का सच बताना. मैं चेक कर सकती हूँ कि सच बोला या नहीं। मैं- बिंदास पूछो, सच ही बताऊंगा। शिप्रा- तुम रात को क्या पहन के सोते हो? मैं- कपड़े और क्या? शिप्रा- मज़ाक नहीं ना यार … तुम जानते हो कि मैंने क्या पूछा है। मैं- ओके ओके … अब मज़ाक नहीं. मैं रात को टीशर्ट और शॉर्ट्स डाल के सोता हूँ। शिप्रा- ओके गुड। मैं- अब मैं पूछूँ … सच बताओगी? शिप्रा- हाँ पूछो। मैं- तुम क्या डाल के सोती हो। शिप्रा- कपड़े डाल के! मैं- मज़ाक नहीं, एक क्वेश्चन तुम सच बोलोगी एक मैं! शिप्रा- ओके, मैं रात को नाईटी पहन कर सोती हूँ। मैं- ओके गुड. अब तुम्हारी बारी। शिप्रा- रात को अंडरगारमेंट्स डाल के सोते हो या नहीं। मैं- कभी कभी! शिप्रा- कभी कभी … क्या मतलब? मैं- मेरा क्वेश्चन है अब! शिप्रा- ओके पूछो। मैं- तुम रात को अंडरगारमेंट्स डाल के सोती हो या नहीं? शिप्रा- ये गलत है. क्वेश्चन अलग अलग होंगे, सेम नहीं. समझे? मैं- ओके इस क्वेश्चन के बाद अलग अलग होंगे. इसका उत्तर तो दो। शिप्रा- हाँ पहन कर सोती हूँ। मैं- ओके, अब तुम पूछो। शिप्रा- रोज़ नहा कर सोते हो या बिना नहाये? मैं- नहाके मुझे बिना नहाये नींद नहीं आती। शिप्रा- गुड। मैं- वन पीस नाईटी डालती हो या टू पीस? शिप्रा- दोनों है कोई भी डाल लेती हूँ। मैं- ओके गुड. शिप्रा- आज नहाये हो? मैं- हाँ. शिप्रा- ओके। मैं- अंडरगारमेंट्स में तुम्हें कौन सा रंग पसंद है? शिप्रा- डार्क कलर्स। मैं- मुझे भी। शिप्रा- नहाते हुए अंडरवियर उतारते हो या नहीं? मैं- हाँ, हमेशा नंगा नहाता हूँ. यह सुनकर उसने ज़ोर से आह की तो मैं बोला- फील ले रही हो क्या? तो वह बोली- बस आज इतना काफ़ी है, कल बात करेंगे। मैंने कहा- नहीं प्लीज फ़ोन मत काटना। शिप्रा- और आगे नहीं बढ़ना प्लीज। मैं- मुझे आज ही बढ़ना है. तुम्हें मेरी कसम आई लव यू! शिप्रा 2 मिनट के बाद बहुत सारी किस करते हुए बोली- जान आई लव यू टू बेबी. कब से सुनने को तरस गयी थी। मैं- तो बोल देती तुम ही! शिप्रा- पता नहीं था तुम करते हो या नहीं! मैं- मैं तो स्कूल टाइम से करता हूँ। शिप्रा- मैं भी आई लव यू बेबी। फिर 15 मिनट हम ‘आई लव यू’ बोलते रहे किस करते रहे और जल्दी से मिलने की बात करने लगे।

पिछले महीने की बात है, जब मैंने रेखा को पहली बार अपनी बाहों में लिया और करीब दो घंटे तक हमने पूरा एंजॉय किया। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग का काम करता हूँ। मैं बैंगलोर के सबसे अच्छे इलाके के एक पार्क में रोज लंच करने के लिए बैठा करता था और मोबाइल चलाया करता था। वहाँ मेरे एक से दो घंटे जरूर बीतते थे। जहाँ पर पार्क है, उसके आस-पास काफी बड़ी-बड़ी अमीर लोगों की कोठियाँ बनी हुई हैं। एक दिन यह हॉट भाभी फक स्टोरी तब बननी शुरू हुई जब मैं लंच करके अपने मोबाइल में ऐसे ही वीडियोज़ देख रहा था। तभी मेरी नज़र एक घर में गई जहाँ बालकनी में एक लेडी बैठी हुई थी। वह अपने फोन पर किसी से बात कर रही थी। मैं तो उस लेडी को देखते ही बस देखता ही रहा! वो कितनी खूबसूरत है यार! देखकर उसकी उम्र करीब 40 की लग रही थी। फेस कटिंग उसकी परफेक्ट और गोरी थी। मैं तो चोरी-चोरी उसे ही देख रहा था। फिर थोड़ी देर बाद वह खड़ी हुई और इधर-उधर घूमकर फोन पर बात करने लगी। उसकी हाइट करीब 5’6″ होगी और उसका बॉडी शेप भी एकदम जैसे जवान लड़की का हो। उसका बदन एकदम भरा हुआ था; नीचे से चूतड़ बड़े, कमर 30 की होगी और फिर ऊपर के बूब्स का साइज़ भी 34 के करीब होगा। मैं तो बस उसे ही देख रहा था। उसे देखने का कार्यकाल करीब 1 घंटे तक चला, फिर वह अंदर चली गई और मैं भी वहाँ से चला गया। अब मैं रोज़ वहाँ आकर बस उस घर की तरफ देखता रहता था चोरी-चोरी। करीब 5 से 6 दिन बाद भी जब वह मुझे नहीं दिखी तो फिर मैंने उम्मीद छोड़ दी कि वह फिर कभी दिखेगी। फिर एक दिन मैं अपना टाइम पूरा करके बस निकलने ही वाला था कि वह खुद पार्क में आकर मेरे सामने वाले चेयर सेट पर बैठ गई। “आज बड़ी जल्दी जा रहे हो, कहीं जाना है क्या?” मैं तो अंदर से खुश भी हुआ और घबरा भी गया कि ये तो आज गजब हो गया! मैंने सकपकाते हुए बोला, “नहीं कहीं नहीं जाना बस, ऐसे ही।” फिर वह बोली, “बैठो, तुमसे कुछ बात करनी है।” मैं सच बताऊं तो डर गया कि क्या बात करेगी… और फिर मैं बैठ गया और बोला, “जी कहिए?” वह बोली, “तुम यहाँ रोज़ लंच करने आते हो?” मैंने बोला, “जी हाँ।” “क्या काम करते हो?” मैंने अपने बारे में बताया। उसने बहुत कुछ पूछा और मैंने सबका जवाब दिया। फिर वह बोली, “एक बात बताओ, तुम जब तक यहाँ बैठते हो तो मेरे घर की बालकनी में क्या देखते हो? कुछ चुराने का इरादा है क्या?” मैंने कहा, “अरे नहीं, ऐसा नहीं है! बस ऐसे ही नज़र चली जाती है।” मैं तो बस उसे देख कर नज़रों से नज़रें मिला कर बातें कर रहा था और उसकी पूरी बॉडी को ध्यान से देख कर फील कर रहा था। वह मेरे सामने थी बस एक मीटर की दूरी पर और वह एकदम कमाल की लग रही थी। उसने एक राउंड नोज़पिन पहन रखी थी, जो उसके चेहरे को और भी सेक्सी बना रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि इसे यहीं पर चूम लूँ! पर अंदर ही अंदर से ये सब चल रहा था और खुद को कंट्रोल कर रहा था। उसके चेहरे को देख कर उसे चोदने का मन कर रहा था और यही सब सोच कर लन्ड एकदम टाइट हो गया था। मैं उसे किसी तरह उससे छुपाने की कोशिश कर रहा था और शायद वह समझ रही थी मैं क्या कोशिश कर रहा था। मैंने उससे कहा, “मैं एक अच्छी फैमिली से आता हूँ, ऐसा कुछ नहीं है जैसा आप सोच रही हो।” उसने कहा, “चलो ठीक है।” और फिर थोड़ी बात करने के बाद वह चली गई। अगले दिन फिर मैं वहीं बैठा और लंच किया और फोन चलाते हुए उधर झाँकने लगा। करीब 10 मिनट बाद वह वहाँ ऐसे ही आयी और ऐसा फील करवा रही थी कि जैसे उसने मुझे देखा नहीं। अचानक हम दोनों ने ही एक-दूसरे को देखा और उसने एक बेहद खूबसूरत सी स्माइल दी, जो उसे और सेक्सी बना रही थी। फिर वह नीचे गई और 5 मिनट में पार्क में आ गई। वह बोली, “तो जनाब, बताओ आज क्या ढूँढ रहे थे? देखो सच बताना, इधर-उधर की बातें नहीं!” तो मैं भी थोड़ा सा मुस्कुराया और बोला, “आप अगर बुरा न मानें तो सच बताऊं? मैं आपको ही वहाँ ढूँढ रहा था!” “अच्छा, पर क्यों?” मैंने कहा, “जब मैंने आपको 10 दिन पहले देखा था पहली बार, उसी दिन आप मुझे बहुत अच्छी लगीं। इसलिए बार-बार मेरी नज़र आपको देखती थी उधर।” वह मेरी इस बात को बहुत ध्यान से सुन रही थी और बोली, “अच्छा अपना नंबर दो, मेरे हसबैंड ने माँगा है। वो आपको कॉल करेंगे और आपकी सर्विसेज़ के बारे में पूछेंगे।” मैंने उसे अपना नंबर दिया। वह ‘बाय’ बोलकर चली गई। दो घंटे के बाद मुझे व्हाट्सएप पे एक मैसेज आया और उसने बताया कि वह रेखा है। फिर हमारी बातें हुईं काफी। उसने सब कुछ पूछना शुरू कर दिया, फिर वह पर्सनल भी हो गई। वह मुझसे बोली, “कोई GF है?” तो मैंने बोला, “मैं शादीशुदा हूँ।” वह ‘ओके’ बोली फिर बताया कि, “कल 11 बजे घर आ जाना, काम है।” मैंने कहा, “ठीक है जी।” अगले दिन मैं करीब 11:15 पर उसके घर पहुँचा और कॉल किया। थोड़ी देर बाद वह खुद गेट खोली और एक मुस्कान के साथ बोली, “अंदर आ जाओ।” मैं अंदर गया। उसका घर काफी बड़ा था। घर में कोई दिखाई नहीं दे रहा था तो मैंने पूछा, “घर पे कौन-कौन है?” वह बोली, “मैं हूँ न! और किसी से भी मिलने आए हो क्या?” मैंने कहा, “नहीं।” फिर वह मुझे रूम दिखाते हुए बोली, “बैठो, मैं टी (चाय) लेकर आती हूँ।” मैं रूम में जाकर सोफे पर बैठ गया। रूम में बड़ा सा सोफा और दो छोटे सोफे लगे हुए थे और एक सिंगल बेड साइड में लगा हुआ था। मैं सोफे पर बैठकर अपना फोन चलाने लगा। करीब 10 मिनट में वह दो कप चाय और स्नैक्स लेकर आई और टेबल पर रखी और सामने वाले सोफे पर आकर बैठ गई। वह बोली, “चाय पियो और बताओ, क्या हाल है?” मैंने कहा, “ठीक है जी। घर में कौन-कौन है आपके?” वह बोली, “मैं, मेरे हसबैंड और एक 6 साल की बेटी है जो स्कूल गई है। हसबैंड फैक्ट्री गए हुए हैं, वो शाम को आयेंगे और बेटी 3 बजे स्कूल से छुट्टी होगी और आते-आते 3:30 बज जायेंगे।” मैंने कहा, “ओह! तो आप इस समय 3 बजे तक अकेले ही रहती हैं।” वह बोली, “हाँ, सुबह 10 बजे तक नौकरानी काम करके चली जाती है, फिर मैं फ्री रहती हूँ।” फिर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थीं। हमने चाय खत्म की, फिर वह मेरी थोड़ा पर्सनल बातें जैसे फैमिली के बारे में पूछी, मैंने बताया। थोड़ी देर सब बातें हुईं, फिर हम दोनों शांत हो गए। थोड़ी देर रुक कर वह बोली, “तुमसे एक बात करनी थी।” मैंने कहा, “जी जरूर कहो।” वह बोली, “अगर उसे तुम किसी से भी मत बताओ और शेयर करो, तो ही वह बात करूंगी।” मैंने कहा, “बिल्कुल सीक्रेट रहेगी जी, उसकी फिकर ना करो!” वह बोली, “तुम्हें मैं कैसी लगती हूँ?” मैंने बोला, “सुंदर हो, अच्छी लगती हो! तभी तो डेली देखता था तुम्हारे घर की तरफ!” वह बोली, “फिर फ्रेंड बनोगे?” मैंने स्माइल करते हुए कहा, “हाँ, क्यों नहीं! आपके साथ अच्छा लगेगा। हम हर बात शेयर करेंगे और आपस में सीक्रेट रखेंगे।” वह बोली, “ठीक है।” उसने अपना हाथ आगे किया हाथ मिलाने के लिए। उसने डीप नेक वाला सूट पहना हुआ था और जब वह झुकी तो उसके बूब्स के क्लीवेज साफ़ दिखाई दिए और मेरा ध्यान सीधे वहीं पर गया। वह बोली, “तो फिर कल से लंच लेकर मत आया करना। घर आ जाना, हम दोनों साथ में लंच किया करेंगे!” मैंने कहा, “ठीक है।” थोड़ी देर बाद वह मेरे बगल में आ बैठी और बोली, “दिखाओ अपने फैमिली की फोटोज।” मैं अपने मोबाइल में उसे फोटोज दिखाने लगा। घर में एकदम सन्नाटा था, सिर्फ हम दोनों थे। जब वह पास में बैठी तो मेरे से कंट्रोल नहीं हो रहा था और मेरा लन्ड एकदम टाइट हो गया था और हल्का सा पानी निकाल रहा था। उसके बदन की खुशबू बहुत अच्छी आ रही थी। उसको मेरे लन्ड के टाइट होने का एहसास हो चुका था और वह कोशिश कर रही थी कि किसी बहाने से उसे छुए। वह भी गरम हो रही थी। मैं आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा था। तभी उससे बोला, “वाशरूम कहाँ है? मैं वाशरूम होकर आता हूँ।” वह बोली, “बाहर है।” मैं जैसे ही जाने के लिए खड़ा हुआ और लन्ड को पैंट में एडजस्ट करने की कोशिश की, वह मेरा हाथ पकड़ कर बैठा दी। वह बोली, “थोड़ी देर बैठो।” मैं बैठ गया। वह एकदम हॉट हो चुकी थी। वह बोली, “देखो, एक औरत को सिर्फ पैसे की नहीं और भी किसी चीज़ की ज़रूरत होती है। जो तुम्हारा मन कर रहा है, कुछ वैसा ही मुझे भी! रुको, मैं कुछ करती हूँ।” मैं तो एकदम चुप था। मैं तो सोच ही रहा था कि वाशरूम जाके मूठ मारूँगा, पर वह पैंट के ऊपर से लन्ड को सहलाने लगी। वह उठ कर नीचे मेरे सामने घुटने के सहारे बैठ कर मेरे पैंट की जिप खोल दी और लन्ड को अंदर से सहलाया और फिर बाहर निकाल दिया। उसकी आँखों में एक अलग ही खुशी और चेहरे पे स्माइल थी। उसने लन्ड को निकाल कर मेरी तरफ देखा और बोली, “सॉरी, पर अब से ये मुझे दे दो!” मैंने कहा, “तुम्हारा ही है, ले लो जहाँ लेना है!” उसने मुस्कुराते हुए लन्ड को पहले जीभ से चाटा, फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई थी! मेरी आँखें खुद बंद हो रही थीं। वह इतने अच्छे से लन्ड को मुँह में लेकर चूस रही थी कि खुद थोड़ी देर बाद मैंने उसका सर पकड़ कर लन्ड को अंदर डालने लगा। करीब 10 मिनट तक वह लन्ड को चूसती रही। फिर मैंने कहा, “रेखा जी, अब मेरी बारी!” और उसे उठाया. हम दोनों खड़े हो गए। फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों के साथ दबा कर चूसने लगा धीरे-धीरे! ये एक बहुत ही प्यारी किस थी। साथ में मैंने उसके सूट को भी उतार दिया और फिर ब्रा को भी। उसका बदन देखकर तो लन्ड जैसे एकदम लाठी बन गया था! उसके बूब्स एकदम परफेक्ट थे। मैंने उन्हें हाथ से मसलना शुरू किया और किस करता रहा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसको सोफे पे बैठाया और घुटने के सहारे मैं नीचे बैठ गया और उसकी सलवार और पैंटी दोनों उतार के साइड में रख दी। मुझे वो लड़कियाँ बहुत पसंद हैं जो राउंड नोज़पिन पहनती हैं। फिर मैंने उसकी टांगे फैलाईं और उसकी तरफ देखा। वह कितनी सेक्सी लग रही थी, मैं बता नहीं सकता! मैंने उसकी टांगों के बीच उसकी चूत को फैलाया और अपनी जीभ एक बार फिराया। उसके मुँह से आह की आवाज़ आई! उसने अपने बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। उसने अपनी टांगें मेरे कंधे पे रख दीं और ज़ोर-ज़ोर से मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबाने लगी। करीब 5 मिनट तक मैंने उसकी चूत चाटी। फिर वह बोली, “प्लीज, अब अंदर डाल दो!” मैंने उसे उठाया और सोफे पे बैठ गया, उसे बोला, “मेरी गोदी में आ जाओ।” वह अपनी टांगों के बीच मेरी टांगें करके बैठ गई। मेरा लन्ड और उसकी चूत दोनों को वह रगड़ रही थी। हम किसिंग कर रहे थे। फिर उसने लन्ड को पकड़ कर चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई। आह की आवाज़ के साथ आँखें बंद! वह मेरे लिप्स को ज़ोर से चूसने लगी और बैठकर थोड़ी देर बस रुकी रही। फिर धीरे-धीरे उसने अपनी कमर हिलानी शुरू की। वह आँखें बंद करके लन्ड को चोद रही थी और मैं उसके बूब्स को चूसने लगा। करीब 5 मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद, वह अपने पैरों को सोफे में रख कर बैठ गई। वह मुझे गर्दन से पकड़ कर बोली, “लन्ड को चूत पे लगाओ, आज मैं अपनी चूत से तुम्हारे लन्ड को चोदूँगी!” फिर मैंने लन्ड को उसकी चूत के छेद पे रखा और वह आराम से उसे अंदर लेकर बैठ गई। और जैसे मिशनरी पोजीशन में लड़के चूत चोदते हैं, वैसे ही वह लन्ड को चोदने लगी। आह-आह की आवाज़ें दोनों की पूरे रूम में गूँज रही थीं। वह चुदायी में एकदम एक्सपर्ट थी! थोड़ी देर बाद उसी पोजीशन में चोदने के बाद वह और ज़ोर-ज़ोर से आह करके चोदने लगी और फिर एकदम से मेरे लन्ड पे बैठ गई, मुझे किस करने लगी और अपनी कमर हिला-हिला कर चोदने लगी। शायद अब उसका पानी निकलने वाला था। फिर वह ज़ोर सी ऐंठन के साथ मुझे ज़ोर से हग करके मेरे लन्ड पे ही बैठ गई। मैंने पूछा, “निकल गया?” उसने खुश होकर स्माइल दी और एक लिप किस की, बोली, “अब अपना भी निकाल लो पानी।” मैंने कहा, “ठीक है, पर मैं अपनी सबसे पसंद वाली पोजीशन में निकालूँगा।” फिर मैंने कहा, “चलो किचन में चलते हैं।” वह थोड़ी हैरान थी पर घर में कोई था नहीं तो वह बोली, “ले चलो मुझे!” मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और नंगे ही दोनों किचन की तरफ चले गए। नंगी तो वह और भी सेक्सी लग रही थी! हम किचन में पहुँचे। वह बोली, “यहाँ कौन सी सेक्स पोजीशन बनाओगे?” मैंने कहा, “बस तुम देखती जाओ!” और मैंने उसे उठा कर किचन की शेल्फ पे बैठा दिया, उसकी दोनों टांगें फैला कर पहले उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। वह एन्जॉय कर रही थी। फिर थोड़ी देर बाद मैं खड़ा हुआ और टांगें फैला कर उसकी चूत में लन्ड को लगाया। एक धक्का मारा ज़ोर से, उसने आह की आवाज़ निकाली और मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया इस पोजीशन में। लन्ड चूत में और साथ में बूब्स को चूसने का और किस करने का अलग मज़ा आता है। इतनी देर हार्ड सेक्स के बाद भी मेरा अभी नहीं निकला। वह बोली, “इतनी देर तक तो आज तक मेरे हसबैंड ने कभी नहीं चोदा होगा!” फिर मैंने कहा, “चलो अब डॉगी स्टाइल में चोदता हूँ, जल्दी निकल जायेगा।” मैंने उसे डॉगी स्टाइल में करीब 5 मिनट तक चोदा। हॉट भाभी फक के बाद मेरा निकलने वाला था तो मैंने लन्ड बाहर निकाल दिया। वह तुरंत पीछे मुड़ी और फ्लोर पे लेट गई। और बोली, “आज लन्ड का सारा पानी मेरे अंदर निकालना प्लीज! मेरी चूत को बहुत टाइम हो गया लन्ड का गरम पानी पिए।” और फिर ज़ोर-ज़ोर से धक्कों के साथ मैंने सारा पानी उसकी चूत में निकाल दिया और उसको लिप किस करके साइड में लेट गया। थोड़ी देर लेटने के बाद वह बोली, “चलो थोड़ा साफ़ कर लो और नहा लो।” फिर वह नहाने गई और थोड़ी देर बाद मैं भी उसके साथ ही अंदर चला गया। वहाँ भी एक राउंड उसको चोदा। वह बहुत खुश थी। फिर मैं गेस्ट रूम में बैठा रहा और वह कॉफ़ी बना कर लाई। हमने कॉफ़ी पी, फिर मैं उसको लिप किस करके हग किया और जाने लगा। वह खुश लग रही थी और मैं चला आया। फिर मुझे याद आया कि मैंने तो सारा पानी लन्ड का उसके अंदर डाला था। कहीं वह प्रेग्नेंट न हो जाए! मैंने उसे कॉल किया और ये बात बोली। वह बोली, “माय डियर, तुम टेंशन मत लो! मैं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती।” मैंने हैरान होकर पूछा, “क्यों?” वह बोली, “कल फिर आना, कल सब बताऊँगी।”